Thursday, September 7, 2023

जाओ पाकिस्तान!

जाओ पाकिस्तान एक बहुत ही आसान शब्द जिसे आप कहीं भी कभी भी और किसी भी मुद्दे पर बोल सकते हैं।
जहां ज्ञान और समझ की बात नहीं कर पाते वहां बस यही शब्द चेप देते हैं।
हमारे देश के उच्च प्रोफाइल नेताओं को जब किसी का सुझाव या उसके अधिकार की बात पसंद नहीं आती तो वह उन्हें देशद्रोही करार देते हैं और पाकिस्तान जाने की नसीहत देने लगते हैं। 
सवाल यह है कि आखिर कब तक यह अज्ञानी फर्जी डिग्री वाले नेता अपनी नाकामी छुपाने के लिए सवाल कर्ताओं को पाकिस्तान जाने की नसीहत देते रहेंगे। 
समझ नहीं आता कि एक भारतीय महिला के स्वास्थ्य के लिए सेनेटरी पैड और पाकिस्तान का एक दूसरे से क्या लेना देना है।

29 सितंबर को महिला एवं बाल विकास निगम की ओर से यूनिसेफ सेव द चिल्ड्रेन और प्लान इंटरनेशनल के तहत पटना में आयोजित "सशक्त बेटी समृद्ध बिहार" कार्यक्रम में उपस्थित एक छात्रा ने जब महिला अधिकारी हरजोत कौर से यह सवाल पूछा की जब सरकार पोशाक और छात्रवृत्ति के लिए पैसा दे ही रही है तो क्या इसी प्रकार स्कूलों में छात्राओं को 20– 30 रुपया का मुफ्त सेनेटरी पैड नहीं दे सकती...... और बस इसी सवाल पर भारतीय प्रशासनिक सेवा की बिहार कैडर के अधिकारी हरजोत कौर भड़क गए और उस छात्रा को पाकिस्तान जाने तक की नसीहत दे डाली। 
मानसिक संक्रमण से ग्रस्त यह मंत्री यहीं नहीं रुकी अपनी अज्ञानता और बड़बोले बोल में ये यह भी बोल गई की आज 20–30 का सेनेटरी पैड दे सकते हैं कल जींस पैंट और सुंदर जूते क्यों नहीं दे सकते, और अंत में परिवार नियोजन की बात आएगी तो कंडोम भी मुफ्त देना पड़ेगा। 
अब इस अशिक्षित अधिकारी को कौन समझाए की एक महिला का विकास जींस पैंट और सुंदर जूतों से नहीं बल्कि उसके स्वास्थ्य से जुड़ा है। इतने मूल्यवान प्रश्न पर ये तर्कहीन जवाब देने की क्या जरूरत थी। 
यही नहीं मैडम अधिकारी ने उस छात्रा से यह कहा कि सरकार से तुम्हें लेने की जरूरत क्या है अपने आपको इतना संपन्न करो कि खुद ले सको।
अब हरजोत कौर के इन बातों का कोई तर्क नहीं है अगर वो समाज के प्रत्येक वर्ग की स्थिति समझ पाती तो शायद यह बात नहीं बोलती। 

अब भला एक 14 ,15 साल की लड़की जो ग्रामीण क्षेत्र से संबंध रखती है कैसे खुद को इतना संपन्न कर ले कि वह खुद सेनेटरी पैड ले सके। और सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली बच्चियां समाज के कैसे वर्ग से आती हैं यह भी सबको पता है, स्वास्थ्य को लेकर इनके घर वाले इतनी शिक्षित और जागरूक नहीं होते कि उन्हें सेनेटरी पैड लाकर दे सकें उनके लिए यह फिजूल खर्च लगेगा। 
ऐसे में इन बालिकाओं की स्वास्थ्य की जिम्मेदारी सरकार की होनी चाहिए क्योंकि स्वस्थ रहेंगी बेटियां तभी तो जागरूक बनेगी बेटियां। 

छात्रा के यह कहे जाने पर कि जब वोट लेने आते हैं तो उस समय नहीं, इस पर बीच में ही टोकते हुए कौर ने कहा "यह बेवकूफी की इंतेहा है, मत दो वोट चली जाओ पाकिस्तान" 
आखिर महिला मंत्री कौर को वोट के नाम पर मिर्ची क्यों लग गई कि वह सीधा पाकिस्तान जाने की नसीहत देने लगी। 
सोचने वाली बात है प्रत्येक वोट में सरकार करोड़ों पैसे खर्च करती है पार्टी की प्रचार और रैलियों में, और जब जनता अपने हक की बात करती है तो उन्हें पाकिस्तान जाने की नसीहत दी जाने लगती है।
भारत के ऐसे मानसिक रूप से बीमार नेताओं की इलाज की जरूरत है। 
और बिहार कैडर की इस महिला अधिकारी का सेनेटरी पैड को लेकर यह बयान बहुत ही निंदनीय और अशोभनीय है, अगर एक पुरुष ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर इस तरह की बात करता तो समझ आ सकता है लेकिन हरजोत कौर इतनी पढ़ी-लिखी महिला होकर ऐसी बात कि यह उनके शिक्षा और मानवता पर सवाल खड़ा करता है।