रिव्या ! मेरी पहली दोस्त आखीरी दुश्मन
रिव्या ! मेरी पहली दोस्त आखीरी दुश्मन...
साल 2008 St. Paul's senior secondary school Sasaram इसी जगह से मेरी छोटी सी टिमटिमाती आंखों ने सपने देखना शुरु कर दिया था।
मैं बाकी के छोटे बच्चों की तरह स्कुल जाने से कभी डरती नहीं थी। बल्की मुझे तो हमेशा चुल मची रहती थी जल्दी स्कुल जाने की। और उस दिन तो कुछ ज्यदा ही खुश थी, क्योंकी स्कुल में अपना पहला कदम जो रखने वाली थी।
और वो मेरी जिंदगी का सबसे हसीन सफर जो पापा के साथ बाइक पिछे बैठ कर तय की थी।
अपने नाजुक से पिठ पर उन हल्की किताबों का बोझ लिये पापा की उंगली पकड़ मैं कैंपस में चल रही थी, वाहां अपने जैसे आते-जाते बच्चों को देखकर मेरी आंखे चमक उठती और मैं उन आंखो में सपने बुनने लगी की आज से मेरे बहुत सारे अच्छे-अच्छे नये-नये दोस्त बनेंगे, मैं उनके साथ बहुत मस्ती करुंगी, ढेर सारी बाते करुंगी।
अपने इन ख्याली ख्वाबों से मैं बाहर तब आई जब क्लास टीचर ने मेरा नाम पुकारा....Welcome Neetu.
क्लासरुम में पहुंचते ही सारे स्टुडेंटस ने सर को Morning wish किया and then उन सब की सवालीयां भरी नजरे मेरी तरफ थी, तब जाकर सर ने उन्हें बताया Meet Neetu आज से आप सब की नई क्लासमेट, तब उन्होने मुझे First bench पर बैठने का इशारा किया, जहां रिव्या पहले से ही थी।
मेरा रिवया का Buddy बनना शायद उसे पसंद नहीं आया क्योंकी पहले दिन हि मैने उसकी बेस्ट फ्रेंड की सिट जो ले ली थी।
मेरे स्कुल के पहले दिन से ही उसने मुझे परेशान करना शुरु कर दिया। कभी खिड़की से मेरा बैग बाहर फेंक देना, कभी मेरे सिट पर पानी गिरा देना, कभी मेरे लंच बाॅक्स में चींटी रख देना, तो कभी मेरे यूनीफाॅम पे कीक मी लीख कर चिपका देना, कि शायद मैं इरीटेट होकर स्कुल आना छोड़ दूं।
पर ऐसा कुछ नहीं हुआ, इनफैक्ट मेरी मासुमीयत के आगे उसका बिगड़ापन हार गया।
और कब पुरे स्कुल में एक आइस और फायर की दोस्ती फेमस हो गई पता ही नहीं चला।
अब क्लास में रिव्या के अच्छे Marks आने लगे थे तो वही स्कुल में मुझे कोई परेशान नहीं कर पाता था।
हमारे लाइफ में सबकुछ सही चल रहा था तभी शायद किसी की नजर लग गई।
I remember हम दोनों 8th class में थे जब पापा के दोस्त का बेटा इशान का Admission भी same class में हुआ। मैं और इशान इक दुसरे को बच्चपन से जानते थे इसलिए स्कुल में जल्दी ही दोस्त बन गये, मेरे साथ-साथ रिव्या से भी उसकीअच्छा दोस्ती थी।
पर शायद रिव्या इशान को लाइक करने लगी थी, जिससे मै बिल्कुल अंजान थी। 9th class में थे हमलोग जब वेलेंटाइन वीक चल रहा था, एंड इशान ने उनदिनों मुझे प्रपोज कर दिया। जिसे देख रिव्या को बहुत गुस्सा आया, और आता भी क्यों न भला उसके साथ गलत जो हुआ। ये सब होने के तुरंत बाद ही उसने एक पल में ही हमारी इतने साल की दोस्ती को खत्म कर दिया।
मैं तो अभी भी हैरान थी की आखीर ये हुआ क्या हमारा 10 साल का फ्रेंडशिप टुट गया सिर्फ इस एक वर्ड Love की वजह से, यह वर्ड जिसके बारे में लोग शेरो शायरी करते है इसे महान बताते है, यही हमारी दोस्ती के टुटने का वजह बना।
उस दिन के बाद से हम तीनों ने एक दुसरे को इगनोर करना शुरु कर दिया। एक वक्त पर एक दुसरे के जान कहें जाने वाली अब अनजान बनने लगी।
पर मुझे ये सब बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था, मुझे रिव्या के साथ रहना था, उससे बाते करनी थी, साथ खेलना था, टाइम स्पेंट करना था। मैं उससे दुर नहीं रह सकती थी, एक दिन मैं जाकर उससे बात की, "यार रिव्या देख मुझे कुछ नहीं पता था, ये सब बस एक Misunderstanding थी, अगर मुझे इस बारे में थोड़ा सा भी कुछ पता होता तो मैं कभी बीच में नहीं आती। I'm sorry यार मुझे किसी से कोई मतलब नहीं, पहले जैसे फिर से एक साथ रहते है न, " मैने उसका हाथ थामते हुए कहा। पर उसने झटके से मेरा हाथ छोड़ते हुए कहा " I know ये सब बस एक Misunderstanding थी पर तेरी वजह से मेरे सारे सपने टुटे है, मैने क्या-क्या सोचा था पर तेरी वजह से सब बर्बाद हो गया, That's why i hate you और मैं कभी भी तझसे अच्छे से बात नहीं कर पाउंगी।"
उस पल के लिये तो मुझे ऐसा लगा कि क्या सच में ये मेरी बेस्ट फ्रेंड थी जीसने एक बार भी मुझसे बात करना तक सही नहीं समझा और बिना सच जाने हमारी इतने साल की दोस्ती बस एक छोटी सी Misunderstanding के वजह से तोड़ दी। एंड मुझे उस गलती की सजा मीली जो गलती मैने की भी नहीं थी। शायद इतने साल से मैं एक गलत रिस्ते में थी। ये सोचकर उसके बाद से मैने कभी किसी से वैसी शिदध्त से दोस्ती नहीं की और नाही आज तक किसी से वैसी दुशमनी निभा पाती हुं।
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