अभिव्यक्ति की आजादी लेकिन कब और कहां....
अनुच्छेद 19 के तहत हमारा संविधान भारत के प्रत्येक नागरिकों को बोलने, लिखने, और अपना विचार प्रकट करने की आजादी देता है। एक भारतीय होने के नाते आप अपनी बातों को लिखकर, बोलकर, छपकर, या हाव भाव के तरीके से लोगों तक पहुंचा सकते हैं।
हमारा देश विविधताओं का देश है, यहां अलग-अलग धर्म, क्षेत्र, भाषा, संस्कृति और विचार के लोग रहते हैं। लेकिन विविधताओं में जो सबसे अहम बात है, वह है इनका विचार क्योंकि इंसान का रहन-सहन उसका रवैया सब उसके विचार पर निर्भर करता है, विचार वास्तव में एक व्यक्ति की पहचान होती है विचार ही वह वजह है जिससे लोगों की शख्सियत बनती और बिगड़ती हैं।
कुछ ऐसे ही कॉमेडियन वीर दास की शख्सियत भी कटघरे मे है, बीते दिनों पहले आई वीर दास की 6 मिनट की वायरल वीडियो ((आई कम फ्रॉम टू इंडिया)) विवादों में रहा । इस 6 मिनट की वीडियो में वह भारत में अच्छे और बुरे पर विचार रखते हैं यह 6 मिनट के वीडियो का विचार ही उनकी शख्सियत पर सवाल खड़ा कर रहा है ।
अब भला ऐसा क्या बोल गए वीर दास उस 6 मिनट के वीडियो में जो इतनी विवादों में है, तो है कुछ ऐसा कि दास अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी के जॉन एफ कैनडी सेंटर में भारत के कथित दोहरे चरित्र के बारे में बोल गए। और कोविड 19 महामारी, दुष्कर्म की घटनाओं, और हास्य कलाकारों के खिलाफ कार्रवाई से लेकर किसान प्रदर्शन जैसे मुद्दों का जिक्र किया।
दास के वीडियो के एक हिस्से के क्लिप में कही गई बात “मै एक ऐसे भारत से आता हूं जहां दिन में स्त्री की पूजा होती है, और रात में गैंगरेप होता है।“ लोगो में उनके प्रति नफरत की भावना पैदा कर रही है।
वीडियो वायरल होने के बाद से ही लोगों ने इस बुरे वाले क्लिप को ट्विटर पर जमकर शेयर किया और दास के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, जिसके बाद दास के खिलाफ दिल्ली और मुंबई में दो FIR दर्ज किए गए और इंदौर में तो वह वीडियो बंद कर दिया गया ।
तो वही इस मुद्दे पर भारत की सियासी भी तेज हो गई बीजेपी ने जहां इसे देश की छवि खराब करने की कोशिश बताई, तो वहीं कांग्रेस ने दास के इस वीडियो को सही बताया।
कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने दास का बचाव करते हुए लिखा कि, यह कोई भी संदेह नहीं कर सकता है कि, दो भारत है, पर बस हम यह नहीं चाहते कि कोई भारतीय इस बात को दुनिया को बताएं ।
देश में तेजी से फैल रहे इस विवाद और कॉमेडियन दास पर कार्रवाई के बाद कॉमेडियन मुनावर फारुख ने कॉमेडी छोड़ने की बात कही है।
जब कोई भारतीय ही अपनी परेशानियों, अपने विचारों, अपनी बातों को बताने में सहज महसूस नही करेगा, तो फिर संविधान के मानव अधिकार में दिया गया यह अभिव्यक्ति और भाषण की स्वतंत्रता कहां रही…।हमारा संविधान यह अधिकार प्रत्येक भारतीयों को दिया है कि वह अपने दिल की बात जुबां पर ला सकें।
दास ने भी बस यही किया, उन्हें यह मानव अधिकार है कि वह अपनी बातें बिना डर भय कहीं भी बोल सकते हैं।
ऐसा करके उन्होंने कोई देश की छवि खराब नहीं किया, क्युकी उनकी बताई गई कुछ परेसनिया हमारी मीडिया चिला चिला कर कहती है, अब हम चीन या नॉर्थ कोरिया में तो रहते नही है जो यहां की जानकारियां दुनिया तक न पहुंच पाए, और भी बहुत सारे अंतराष्ट्रीय न्यूज़ चैनल है जो भारत में कार्यरत हैं, जैसे की BBC हिंदी ही, आज हमारा देश वैश्वीकरण का हिस्सा है इसकी अच्छाइयां और बुराइयां दुनिया के सामने पहले से ही है, तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि वीर दास के उस 6 मिनट के वीडियो से देश की छवि खराब हो रही है। तो किसी व्यक्ति के अभिव्यक्ति की आजादी पर सवाल उठाना गलत है।
परंतु हमारा संविधान यह भी नहीं कहता कि, आप अपने स्वदेश की बुराई विदेशों में करो।
आपको अभिव्यक्ति की आजादी है लेकिन अपने राष्ट्र के विरोध दूसरे राष्ट्र में बोलना, आपको देश विरोधी बनाती है, और यह सबको पता है कि दास ने अपने वीडियो में क्या कहा है, उन्होंने दो भारत को परिभाषित किया है, एक जिसमे उसकी अच्छाइयों को बताते है, तो दूसरे में उसके कमियों को, इसमें कहीं से भी देश के विरुद्ध बोला जाना नहीं लगता है।
वीडियो कि विवादों में आने के बाद दास ने बस इतना कहा कि, वह अपना काम जारी रखेंगे, रुकेंगे नहीं, उनका काम लोगों को हंसाना है, अगर जिनको मजेदार नहीं लगता वह ना हंसे।
उनका इरादा बस यह याद दिलाना था कि, देश अपने तमाम मुद्दों के बाद भी महान है ।



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