Friday, February 28, 2025

जब सच बोलना भारी पड़ जाए: वीर दास, और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सवाल

 

जब सच बोलना भारी पड़ जाए: वीर दास, और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सवाल

भारत का संविधान सभी नागरिकों को अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत यह अधिकार देता है कि वे अपने विचारों को बोलकर, लिखकर या किसी भी माध्यम से स्वतंत्र रूप से व्यक्त कर सकें। इस अधिकार का नाम है, अभिव्यक्ति की अजादी  (Freedom of Speech and Expression)।

लेकिन सवाल यह है कि क्या आज के भारत में यह आज़ादी सच में मौजूद है? हाल के दो चर्चित मामलों , कॉमेडियन वीर दास और कंटेंट क्रिएटर रणवीर इलाहाबादिया  को देखकर लगता है कि अगर कोई व्यक्ति अपनी बात ज़रा अलग तरीके से कह दे, तो उसे देशद्रोही, आलोचना का शिकार, या ट्रोलिंग का निशाना बना दिया जाता है।

आइए इन दोनों घटनाओं को समझते हैं और देखते हैं कि कैसे ये भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।

वीर दास और I Come From Two India’s विवाद:

2021 में वॉशिंगटन डीसी के एक स्टेज पर वीर दास ने 6 मिनट का एक मोनोलॉग पेश किया, जिसका शीर्षक था, I Come From Two India’s.  इस वीडियो में उन्होंने भारत की अच्छाइयों और बुराइयों, दोनों पर बात की। एक लाइन ने सबसे ज़्यादा विवाद खड़ा किया वो था, “मैं एक ऐसे भारत से आता हूं, जहां दिन में महिलाओं की पूजा होती है, और रात में गैंगरेप होता है।” यह बयान सोशल मीडिया पर आग की तरह फैला और कुछ लोगों ने इसे “देश की छवि खराब करने वाला” बताया। वीर दास के खिलाफ दिल्ली और मुंबई में एफआईआर दर्ज की गईं, और उन्हें ट्रोलिंग और धमकियों का सामना करना पड़ा।

लेकिन क्या  उन्होंने कुछ गलत कहा,  नहीं  वीर दास ने जो बात कही, वो एक तथ्य है, जिसे हमारा समाज और मीडिया भी आए दिन उठाता है। उन्होंने देश की दो सच्चाइयों को साथ रखकर एक सवाल खड़ा किया  क्या हम सच का सामना करने को तैयार हैं? यह मामला हमें याद दिलाता है कि अभिव्यक्ति की आज़ादी का मतलब सिर्फ तारीफ़ करना नहीं है। इसका असली मतलब है कि आप सच बोलने की हिम्मत रख सकें, भले ही वह किसी को अच्छा न लगे।

क्या था वीडियो में?

 आखिर ऐसा क्या था उस विडियों में जो अन्य जरुरी मुद्दों को छोड़ लोग और पुरा मीडिया इस  पर बहस छेड़ दी। दरअसल वीर दास ने यह वीडियो अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी में एक शो के दौरान प्रस्तुत किया। इसमें उन्होंने भारत में चल रहे कई मुद्दों का ज़िक्र किया  जैसे कि, कोविड-19 महामारी की स्थिति, भारत में महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराध, किसानों का आंदोलन और कॉमेडियनों पर हो रही कार्रवाई का जीक्र। वीडियो के कुछ अंश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए, और लोग  वीर दास पर देश की छवि खराब करने का आरोप लगाया जाने लगा।

क्या अभिव्यक्ति की आज़ादी पर खतरा?

इस विवाद के बाद कई कॉमेडियन, जैसे मुनव्वर फारूकी, ने भी कहा कि अब वे मंच पर बोलने में डर महसूस करते हैं। ऐसे में  सवाल उठता है कि क्या हमारे देश में अब लोग अपने अनुभव और विचार खुलकर नहीं रख सकते? संविधान तो हर नागरिक को यह अधिकार देता है कि वह अपने दिल की बात बिना डर के कह सके। वीर दास ने भी यही किया  उन्होंने देश के कुछ सच को  सामने रखा , जो अक्सर हमारी मीडिया भी दिखाती है।

भारत कोई बंद देश नहीं है , यहाँ पर विदेशी मीडिया, जैसे BBC, भी काम करती है। ऐसे में अगर कोई कलाकार अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी राय रखता है, तो क्या उसे देशद्रोह कहना उचीत है।

देशभक्ति का मतलब क्या है?

कुछ लोग मानते हैं कि देश की बुराइयों को विदेशों में बताना गलत है। लेकिन वीर दास ने दो भारत की बात की,  एक अच्छा और एक जिसमें सुधार की ज़रूरत है। उन्होंने अपनी परफॉर्मेंस के अंत में यही कहा कि, मेरा मकसद सिर्फ यह याद दिलाना था कि इन सबके बावजूद, भारत एक महान देश है।

निष्कर्ष:

वीर दास ने जो भी कहा, वह उनके अनुभव और सोच पर आधारित था। उन्होंने कोई झूठ नहीं बोला, बल्कि उन मुद्दों की बात की जो देश में मौजूद हैं। हमें यह समझने की ज़रूरत है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं कि हर बात सबको अच्छी लगे, लेकिन इसका मतलब यह ज़रूर है कि हर किसी को अपनी बात कहने का हक है। अगर हम अपने ही लोगों को सच बोलने से रोकेंगे, तो फिर संविधान में दी गई आज़ादी का मतलब ही क्या रह जाएगा?

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