Saturday, December 11, 2021

जनरल बिपिन रावत जीवनी...

 

पहली गोली हमारी नहीं होगी पर उसके बाद हम गोलियों की गिनती भी नहीं करेंगे।।

भारत के पहले CDS , chief of defense staff  बिपिन रावत कि कहीं यह बड़ी बात ही वजह थी कि उन्होंने 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक को सफलतापूर्वक अंजाम दिया ।

 

16 मार्च 1958 को उत्तराखंड के गढ़वाल जिले के पौड़ी में जन्मे जनरल बिपिन रावत अपने परिवार के कई पीढ़ियों को सेना में सेवा देते देखते आ रहे थे, उनके पिता लक्ष्मण सिंह रावत पौड़ी गढ़वाल जिले के सैंजी गाव से थे, और वह सेना में लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर थे। और यहीं से जनरल रावत को इंडियन आर्मी में जाने की प्रेरणा मिली।

जनरल रावत ने अपनी शुरुआती शिक्षा देहरादून के कैंबरीन हॉल स्कूल और शिमला के सेंट एडवर्ड से पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने खड़कवासला स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में दाखिला लिया और फिर भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून से स्नातक में प्रथम श्रेणी की उपाधि अपने नाम की और यहां उनकी बेहतरीन प्रदर्शन के लिए सोर्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित किया गया।

जनरल रावत सिर्फ यही नहीं रुके बल्कि उन्होंने डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज वेलिंगटन से स्नातक की शिक्षा ली, और फोर्ट लेवनवर्थ कंसा स्थित यूनाइटेड स्टेट्स आर्मी कमांड एंड जनरल स्टाफ कॉलेज से 1997 में उपाधि ग्रहण की।

उन्होंने मद्रास यूनिवर्सिटी से रक्षा अध्ययन में एमफिल की डिग्री और मैनेजमेंट एंड कंप्यूटर अध्ययन में डिप्लोमा भी हासिल किया।

जनरल बिपिन रावत को 2011 में चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी से सैन्य मीडिया के क्षेत्र में शोध के लिए पीएचडी की उपाधि दी गई ।

रावत की मिलिट्री कैरियर की बात करें तो, 16 दिसंबर 1978 को उन्हें सेना के ऐतिहासिक 11 गोरखा राइफल्स की पांचवी बटालियन में शामिल किया गया, इनके पिता भी इसी बटालियन के हिस्सा रह चुके थे।

इस बटालियन में रहते हुए जनरल रावत ने कई बड़ी लड़ाई में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इंडियन आर्मी में काम करते हुए रावत ने कई बटालियन के लिए काम किया जिससे उनको अलग-अलग जगहों की सुरक्षा और युद्ध नीति का अनुभव हुआ।

 लगातार अलग-अलग आर्मी ऑपरेशंस को अच्छे से संभालने के कारण जनरल रावत का समय के साथ-साथ प्रमोशन होता गया।

जनरल रावत ने 1 सितंबर 2016 को सेना उप प्रमुख पद को संभाले, 31 दिसंबर 2016 को सेना के प्रमुख पद को तो वही 31 दिसंबर 2019 को भारत के पहले सीडीएस पद को संभाले।

एक नजर जनरल रावत की निजी जिंदगी पर डाले तो इनकी सिर्फ दो बेटियां हैं कृतिका रावत और तारिणी रावत, इनकी बड़ी बेटी कृतिका की शादी हो चुकी है और उसका एक बेटा भी है तो वही छोटी बेटी तारिणी पेशे से वकील है और वह दिल्ली में ही अपने माता पिता के साथ रहती थी,।

जनरल रावत मधुलिका रावत के साथ 1986 में शादी के सूत्र में बंधे  तब वे आर्मी में कैप्टन थे, ।

अगर हम मधुलिका रावत की बात करें तो डॉक्टर मधुलिका रावत दिल्ली यूनिवर्सिटी से मनोविज्ञान की अध्ययन की थी और वह CDS रावत की राष्ट्र सेवा के लिए बहुत सहायक थी।

वह आर्मी वाइफ्स वेलफेयर एसोसिएशन (AWWA) की अध्यक्ष की थी, भारतीय सेना की चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की पत्नी की यह जिम्मेदारी होती है ।

AWWA के अलावा ये कई सोशल वर्क करती थी, खासकर कैंसर पीड़ित के लिए, ।

मधुलिका रावत मुख्य रूप से मध्य प्रदेश के शहडोल जिले से थी।

 अग्नि के सात फेरों के साथ जिंदगी की शुरुआत हुई, और वह अग्नि के साथ साथ खत्म हो गया ।

आपको बता दें कि 8 दिसंबर को तमिलनाडु के कुन्नूर में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत सहित 11 अन्य शहीद हो गए थे ।

  

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